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हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या नए कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। गणेश जी को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि गणपति की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस लेख में हम आपको गणेश पूजा की संपूर्ण विधि मंत्रों सहित चरणबद्ध तरीके से बताएंगे, जिसे आप घर पर आसानी से कर सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार गणेश जी की पूजा के बिना कोई भी पूजा संपूर्ण नहीं मानी जाती। चाहे विवाह हो, गृह प्रवेश हो, नई दुकान का उद्घाटन हो या फिर नवरात्रि-दिवाली जैसे पर्व — सबसे पहले गणपति वंदना की जाती है। बुधवार का दिन विशेष रूप से गणेश जी को समर्पित माना जाता है और गणेश चतुर्थी पर्व पर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजा शुरू करने से पहले निम्नलिखित सामग्री इकट्ठा कर लें:
पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और गणेश जी की मूर्ति को साफ चौकी पर स्थापित करें।
पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप यह पूजा किस उद्देश्य से कर रहे हैं।
संकल्प मंत्र: ॐ विघ्नेश्वराय नमः, मम सर्वविघ्नोपशान्तये गणपति पूजनं करिष्ये।
घी या तेल का दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ करें।
मंत्र: दीपज्योति परब्रह्म दीपज्योति जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
गणेश जी को पूजा में पधारने के लिए आमंत्रित करें।
आवाहन मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः, आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि।
गणेश जी को बैठने हेतु आसन अर्पित करें।
मंत्र: ॐ गणेशाय नमः, आसनं समर्पयामि।
गणेश जी के चरण धोने हेतु जल अर्पित करें, फिर हाथ धोने हेतु जल और आचमन के लिए जल चढ़ाएं।
मंत्र:
ॐ गणेशाय नमः, पाद्यं समर्पयामि।
ॐ गणेशाय नमः, अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ गणेशाय नमः, आचमनीयं समर्पयामि।
गणेश जी की मूर्ति को जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से पंचामृत स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः, स्नानं समर्पयामि।
गणेश जी को वस्त्र (मौली या लाल कपड़ा) और जनेऊ अर्पित करें।
मंत्र: ॐ गणेशाय नमः, वस्त्रं समर्पयामि। यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
गणेश जी के मस्तक पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः, चन्दनं समर्पयामि। अक्षतान् समर्पयामि।
गणेश जी को लाल पुष्प और 21 दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें - यह उन्हें अत्यंत प्रिय मानी जाती है।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः, पुष्पाणि समर्पयामि, दूर्वांकुरान् समर्पयामि।
धूपबत्ती और दीपक से गणेश जी की आरती करें।
मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः, धूपम् आघ्रापयामि। दीपं दर्शयामि।
मोदक, लड्डू या मिठाई का भोग अर्पित करें, क्योंकि मोदक गणेश जी का प्रिय भोग माना जाता है।
मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः, नैवेद्यं समर्पयामि।
अब गणेश जी के मूल मंत्र का 108 बार जाप करें, इसके लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।
मूल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥
अन्य प्रमुख गणेश मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
मंत्र जाप के बाद गणेश जी की आरती करें ("जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...") और घंटी बजाते हुए परिवार सहित आरती में सम्मिलित हों।
आरती के बाद गणेश जी की परिक्रमा करें और साष्टांग प्रणाम करें।
प्रार्थना मंत्र: गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥
पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें और अंत में प्रसाद सभी में वितरित करें।
क्षमा मंत्र: मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं गणाधिप।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
गणेश पूजा विधिपूर्वक और सच्ची श्रद्धा के साथ करने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख, समृद्धि व ज्ञान का वास होता है। ऊपर बताई गई विधि और मंत्रों का पालन करके आप घर पर ही सरलता से भगवान गणेश की संपूर्ण पूजा कर सकते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः॥