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शिव चालीसा संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में | Shiv Chalisa Full Lyrics in Hindi Pujaabhishekam Blog

शिव चालीसा संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में | Shiv Chalisa Full Lyrics in Hindi

📅 31 Aug 2026 ⏱ 3 min read

भगवान शिव को समर्पित शिव चालीसा एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है, जिसका पाठ श्रद्धालु सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में विशेष रूप से करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस लेख में आपको शिव चालीसा के संपूर्ण, शुद्ध और सटीक बोल (लिरिक्स) हिंदी में — साथ ही आसान Hinglish (रोमन हिंदी) में भी — मिलेंगे, ताकि हर भक्त सही उच्चारण के साथ पाठ कर सके।

शिव चालीसा पाठ का महत्व

शिव चालीसा में कुल 40 चौपाइयाँ हैं, जो दोहे से शुरू होकर दोहे पर ही समाप्त होती हैं। इसमें भगवान शिव के स्वरूप, उनकी लीलाओं, समुद्र मंथन, त्रिपुरासुर वध, जलंधर वध जैसी कथाओं का वर्णन मिलता है। भक्तगण मानते हैं कि सच्चे मन और शुद्ध उच्चारण के साथ इसका पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa)  हिंदी + Hinglish

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujan।
Kahat Ayodhyadas Tum, Dehu Abhay Vardan॥

चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

Jai Girija Pati Deen Dayala। Sada Karat Santan Pratipala॥ Bhal Chandrama Sohat Neeke। Kanan Kundal Nagfani Ke॥

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
Ang Gaur Shir Gang Bahaye। Mundmal Tan Kshar Lagaye॥
Vastra Khal Baghambar Sohe। Chhavi Ko Dekh Naag Muni Mohe॥

मैना मातु के हृदय कुमारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
Maina Matu Ke Hriday Kumari। Baam Ang Sohat Chhavi Nyari॥
Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari। Karat Sada Shatrun Kshaykari॥

नंदि गणेश सोहैं तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
Nandi Ganesh Sohain Tah Kaise। Sagar Madhya Kamal Hain Jaise॥
Kartik Shyam Aur Ganrau। Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kau॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहि दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
Devan Jabahi Jaay Pukara। Tabahi Dukh Prabhu Aap Nivara॥
Kiya Upadrav Tarak Bhari। Devan Sab Mili Tumahi Juhari॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लव निमेष महँ मारि गिरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
Turat Shadanan Aap Pathayau। Lav Nimesh Mah Maari Girayau॥
Aap Jalandhar Asur Sanhara। Suyash Tumhaar Vidit Sansara॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥ किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
Tripurasur San Yuddh Machai। Sabahi Kripa Kar Leen Bachai॥
Kiya Tapahi Bhagirath Bhari। Purab Pratigya Tasu Purari॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
Danin Mah Tum Sam Kou Nahi। Sevak Stuti Karat Sadahi॥
Ved Naam Mahima Tav Gai। Akath Anadi Bhed Nahi Pai॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥ कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥
Pragat Udadhi Manthan Mein Jwala। Jarat Surasur Bhaye Vihala॥
Keenh Daya Tah Kari Sahai। Neelkanth Tab Naam Kahai॥

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥ सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
Poojan Ramchandra Jab Keenha। Jeet Ke Lank Vibhishan Deenha॥
Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhari। Keenh Pareeksha Tabahi Purari॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहँ सोई॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi। Kamal Nayan Poojan Chah Soi॥
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar। Bhaye Prasann Diye Ichchhit Var॥

जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
Jai Jai Jai Anant Avinashi। Karat Kripa Sab Ke Ghatvasi॥
Dusht Sakal Nit Mohi Satavai। Bhramat Rahau Mohi Chain Na Aavai॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
Trahi Trahi Main Naath Pukaro। Yahi Avsar Mohi Aan Ubaro॥
Lai Trishul Shatrun Ko Maro। Sankat Se Mohi Aan Ubaro॥

मात पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
Maat Pita Bhrata Sab Koi। Sankat Mein Poochhat Nahi Koi॥
Swami Ek Hai Aas Tumhari। Aay Harahu Ab Sankat Bhari॥

धन निर्धन को देत सदा ही। जो कोई जांचे सो फल पाही॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi। Jo Koi Jaanche So Phal Paahi॥
Astuti Kehi Vidhi Karau Tumhari। Kshamahu Naath Ab Chook Hamari॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
Shankar Ho Sankat Ke Nashan। Mangal Karan Vighna Vinashan॥
Yogi Yati Muni Dhyan Lagavai। Narad Sharad Sheesh Navavai॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत हैं शंभु सहाई॥
Namo Namo Jai Namo Shivay। Sur Brahmadik Paar Na Paay॥
Jo Yah Path Kare Man Lai। Ta Par Hot Hain Shambhu Sahai॥

ऋद्धि सिद्धि घर में सब होई। यह चालीसा जो कोई पढ़ैहोई॥ पुत्र हीन इच्छा कर कोई। निश्चय शिव प्रसाद ताहि होई॥
Riddhi Siddhi Ghar Mein Sab Hoi। Yah Chalisa Jo Koi Padhai Hoi॥
Putra Heen Ichchha Kar Koi। Nishchay Shiv Prasad Tahi Hoi॥

पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥ त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहिं ताके रहे कलेशा॥
Pandit Trayodashi Ko Lave। Dhyan Poorvak Hom Karave॥
Trayodashi Vrat Kare Hamesha। Tan Nahi Take Rahe Kalesha॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शिव चालीसा शीश नवावे॥ जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
Dhoop Deep Naivedya Chadhave। Shiv Chalisa Sheesh Navave॥
Janam Janam Ke Paap Nasave। Ant Dham Shivpur Mein Pave॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
Kahai Ayodhyadas Aas Tumhari। Jaani Sakal Dukh Harahu Hamari॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
Nitya Nem Kar Prataha Hi, Path Karau Chalisa।
Tum Meri Manokamna, Poorn Karo Jagdish॥

मगसर छठि हेमन्त ऋतु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
Magsar Chhathi Hemant Ritu, Samvat Chausath Jaan।
Astuti Chalisa Shivahi, Poorn Keen Kalyan॥

शिव चालीसा पाठ करने की विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. शिवलिंग या शिव प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएँ।
  3. बेलपत्र, जल और दूध अर्पित करें।
  4. शांत मन से शिव चालीसा का पाठ करें।
  5. अंत में आरती करके भोग अर्पित करें।

निष्कर्ष

शिव चालीसा भोलेनाथ की भक्ति और कृपा पाने का एक सरल व सशक्त माध्यम है। नियमित पाठ से मन को शांति मिलती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। "ॐ नमः शिवाय" के जाप के साथ प्रतिदिन इस चालीसा को पढ़ने का प्रयास करें।

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