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सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करना संक्रांति कहलाता है। ये वो वक्त है ,जो दान पुण्य के लिए उत्तम माना जाता माना जाता है। मान्यता है कि इस संक्रांति काल में दान पुण्य का सबसे अधिक फल प्राप्त होता है। अब बात करते है कर्क संक्रांति की। इसे सावन या श्रावण संक्रांति भी कहते है। जाहिर तौर पर स्पस्ष्ट है कि ये शिव भगवान की आराधना का महीना होता है। इसमें सूर्य का एक राशि से दुसरी राशि में प्रवेश होना श्रावण संक्रान्ति कहलाता है। सीधे तौर पर समझे तो सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश ही कर्क संक्रान्ति होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसे 6 महीने के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है। साथ ही इस दिन से दक्षिणायन की शुरुआत होती है ,जो मकर संक्रन्ती में समाप्त होता है।
तिथि तथा समय -कर्क संक्रान्ति इस वर्ष 16 जुलाई दिन शुक्रवार को हैं।
संक्रांति के दिन पूजा -अर्चना करने के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बाटा जाता है। जैसा कि हम सभी जानते है ,संक्रांति एक शुभ दिन होता है। कर्क संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना करना अत्यधिक कल्याणकारी माना जाता है।